बदलता भारत और लोगो का विचार “

बदलता हिन्दुस्तान
 यह मेरा पहली पुस्तक है, यह पुस्तक मैने यह पुस्तक बदलते हिन्दुस्तान पर लिखने जा रहा हूँ,
मैं सुरु कर रहा हूँ भारत में विभिन्नता में एकता से – एक समय था जब हमारा भारत विभिन्नता में एकता के लिए जाना जाता था, यह बात लगभग आज से 15 साल पहले की है जब सभी धर्म साथ मिलकर बड़ी खुशी से सारे तौहार मनाते थे


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लेकिन आज भारत वह भारत नही रहा, आज बात करे सभी धर्म की तो गलत होगा क्योंकि आज हिंदू धर्म के हि कई टुकड़े हो गये हैं,  बात बस अलग होने तक नहीं है बात तो एक दूसरे को निचा दिखाने और हराने तक पहुँच गया है,  हर कोई आपस में ही लड रहा है दुश्मन तो एक दूसरे के खुद हो गये हैं तो क्या हम यह कहे कि भारत आज भी हमारा वही पुराना भारत है,  नही बदल चुका है हमारा भारत |
क्या है इसका कारण -:
अगर मैं सही सोच रहा हूँ तो इसका मुख्य कारण हमारे देश की गंदी राजनीति है,  आज जो भी राजनीति पार्टी तैयार हो रही हैं उनका मेन मुद्दा होता है धर्म और जाती,  यंहा हर कोई अपने जाति को लेकर एक पार्टी तैयार कर रहा है लेकिन क्या इससे हमारे देश को या फिर जनता को फायदा है | नही फायदा तो बस पार्टी के मुखिया को है, देश के छोटे -छोटे जाती को वह स्तेमाल कर रहे है उन गरीब लोगो को बहला फुसलाकर उनसे धरना, भूख हड़ताल, रैली जैसी कार्यक्रम करवाते है , उनसे छुटा वादा करते,  पर क्या कभी वो लोग जो धरना देने के लिए तैयार रहते हैं उन्हेने ये सोचा है कि
गांव  -: सुरुआत करते हैं गाँव से पहले गॉव में परिवार मिल कर रहते थे,  चाचा चाची,  दादा दादी, भईया भाभी,  सब मिल कर एक साथ मिलकर बड़ी खुशी से रहते थे,  लेकिन आज ऐसा नहीं है गांव भी बदल गया है जैसे ही शादी होती है तो एक दो साल बाद से ही बच्चे अकेले रहने के बारे में सोचने लगते हैं,
मैने देखा है जिस बच्चे के लिए पिता ने अपनी सारी उमर गुजार दी मजदुरी करते करते,  बच्चे उसी पिता को 100 रु देने के बाद कहते है की मैने आपको जो पैसा दिया था वो मुझे चाहिये,  जिस मॉ ने आपना दूध पिला कर ,और 20 साल अपने हाथों से रोटी बनाकर खिलाई है. उसी मॉ से कहते हैं की तु खुद खाना बनाकर खा ले मेरी पत्नी नही बनायेगी तेरे लिए खाना, जो मॉ बाप उन्हें ईतना बडा किया उन्हें ओ भूल जाते है,
ओ ये क्यो भूल जाते है कि हम जैसा अपने माता पिता और सास ससुर के साथ करेंगे हमारे बच्चे भी हमारे साथ करेंगे –
किसी ने सच ही कहा है कि.
हम जैसा बोयेंगे, वैसा ही काटेंगे ….

हम जल्द ही आयेंगे अगला भाग लेकर – फॉलो करे

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