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Biograhy of Bihari Lal, कवि बिहारी लाल कि जीवनी |

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Biograhy of Bihari Lal, कवि बिहारी लाल कि जीवनी |

biography of Bihari lal
biography of Bihari lal

Raja Porus ka Itihas in Hindi- इस भारतीय रजा से हारा था सिकंदर ? History

प्रारम्भिक जीवन :


नाम : बिहारी लाल। biography of Bihari lal • जन्म : संवत् 1595 के आसपास, ग्वालियर, मध्य प्रदेश।
सन 1663 में उनकी मृत्यु हो गई।
• पिता : केशवराय ।

महाकवि बिहारीलाल का जन्म 1603 के लगभग ग्वालियर में हुआ। biography of Bihari lal उनके पिता का नाम केशवराय था व वे माथुर चौबे जाति से संबंध रखते थे। बिहारी का बचपन बुंदेल खंड में बीता और युवावस्था ससुराल मथुरा में व्यतीत की। उनके एक दोहे से उनके बाल्यकाल व यौवनकाल का मान्य प्रमाण मिलता है:

जनम ग्वालियर जानिए खंड बुंदेले बाल।

तरुनाई आई सुघर मथुरा बसि ससुराल।।

बिहारी की एकमात्र रचना सतसई (सप्तशती) है। kavi Bihari Lal ki jiavani यह मुक्तक काव्य है। इसमें 719 दोहे संकलित हैं। कतिपय दोहे संदिग्ध भी माने जाते हैं। सभी दोहे सुंदर और सराहनीय हैं तथापि तनिक विचारपूर्वक बारीकी से देखने पर लगभग २०० दोहे अति उत्कृष्ट ठहरते हैं। ‘सतसई’ में ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ है। ब्रजभाषा ही उस समय उत्तर भारत की एक सर्वमान्य तथा सर्व-कवि-सम्मानित ग्राह्य काव्यभाषा के रूप में प्रतिष्ठित थी। इसका प्रचार और प्रसार इतना हो चुका था कि इसमें अनेकरूपता का आ जाना सहज संभव था। बिहारी ने इसे एकरूपता के साथ रखने का स्तुत्य सफल प्रयास किया और इसे निश्चित साहित्यिक रूप में रख दिया। इससे ब्रजभाषा मँजकर निखर उठी। Bihari Lal ki Jivani

Bihari Lal सतसई को तीन मुख्य भागों में विभक्त कर सकते हैं- नीति विषयक, भक्ति और अध्यात्म भावपरक, तथा शृगांरपपरक। इनमें से शृंगारात्मक भाग अधिक है। कलाचमत्कार सर्वत्र चातुर्य के साथ प्राप्त होता है। शृंगारात्मक भाग में रूपांग सौंदर्य, सौंदर्योपकरण, नायक-नायिकाभेद तथा हाव, भाव, विलास का कथन किया गया है। नायक-नायिकानिरूपपण भी मुख्त: तीन रूपों में मिलता है- प्रथम रूप में नायक कृष्ण और नायिका राधा है। इनका चित्रण करते हुए धार्मिक और दार्शनिक विचार को ध्यान में रखा गया है। इसलिए इसमें गूढ़ार्थ व्यंजना प्रधान है, और आध्यात्मिक रहस्य तथा धर्ममर्म निहित है। द्वितीय रूप में राधा और कृष्ण का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया किंतु उनके आभास की प्रदीप्ति दी गई है और कल्पनादर्श रूप रौचिर्य रचकर आदर्श चित्र विचित्र व्यंजना के साथ प्रस्तुत किए गए हैं।

बतरस लालच लाल की मुरली धरी लुकाय ।

सौंह करे, भौंहनु हंसे दैन कहे, नटि जाय ।।


biography of Bihari lal

Books पुस्तकें :

• बिहारी सतसई / बिहारी
• बिहारी के दोहे
• बिहारी लाल के पचीस दोहे / बिहारी

काव्य :

• माहि सरोवर सौरभ लै
• है यह आजु बसन्त समौ
• बौरसरी मधुपान छक्यौ
• जाके लिए घर आई घिघाय
• खेलत फाग दुहूँ तिय कौ
• नील पर कटि तट
• जानत नहिं लगि मैं
• वंस बड़ौ बड़ी संगति पाइ
• गाहि सरोवर सौरभ लै
• बिरहानल दाह दहै तन ताप
• सौंह कियें ढरकौहे से नैन
• केसरि से बरन सुबरन
• रतनारी हो थारी आँखड़ियाँ
• हो झालौ दे छे रसिया नागर पनाँ
• उड़ि गुलाल घूँघर भई
• मैं अपनौ मनभावन लीनों
• पावस रितु बृन्दावनकी

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