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film Article 15 क्यों चर्चित हैं , ऐसा क्या है इसमे आइये जाने ?

film Article 15  क्यों चर्चित हैं , ऐसा क्या है इसमे आइये जाने ?

Article 15 , आर्टिकल 15

film Article 15 – क्या है आर्टिकल 15 और इस पर बनी फिल्म में क्या दिखाया गया है आइये विस्तार से जानते है – अनुच्छेद / आर्टिकल 15 – में यह साफ़ साफ़ लिखा है की कोई व्यक्ति किसी भी व्यक्ति अथवा धर्म जाती , स्थान से भेद भाव नहीं करेगा ,

लेकिन संबिधान लिखे जाने के बाद भी यह भेद भाव कम नहीं हुआ और लोग छोटे जाती को अछूत मानते रहे | इसी पर बनी है ये फिल्म आर्टिकल 15 जो आज कल चर्चे में है | इस फिल्म की टेलर लांच हो चुकी है, आइये जानते है इस फिल्म में है क्या – film Article 15

फिल्म आर्टिकल 15 – आयुषमान खुराना इस फिल्म में लीड रोल में है यह फिल्म जाती पात और उच्च नीच पर बनी है , फिल्म में दिखाया गया है किस तरह उचे जाती के लोग निचे जाती के लोगो के साथ व्वहार करते है , यह फिल्म 28 जून को रिलीज हो गई है और इसको अच्छा रिस्पोंस भी मिल रहा है |और साथ ही इसे सोसल मिडिया पर भी बहुत तारीफ हो रही है |

फिल्म में ये कुच्छ दयालोक है जो काफी चर्चित हुए है –

 “ये साला पोजिशन वालों की अपनी ही एक जात है ।”

” समस्या के बारे में बात करने वाला व्यक्ति सबसे बड़ी समस्या है ।”

” हादसा ये नही है कि हादसा हो चुका है। उससे बड़ा हादसा तो ये है कि सब चुप है।”

“जब दलित पिता रोते हुए पुलिस ऑफिसर से बोलता है “साहब हमारी बेटी को उठाकर ले गए थे । रात भर रखकर सुबह वापस भेज देते न । मार क्यो डाला ?? “आर्टिकल 15″ के इस डायलाग को सुनने के बाद थियेटर के अंधेरे में भी शर्म से सर झुक जाए । ग्रामीण इलाकों में दलितों की दुर्दशा से जो इंकार करता है उसका मतलब है उसने गाँव नही देखा है । फ़िल्म के एक दृश्य में जब दलित व्यक्ति गटर के काले पानी में नाक बंद कर डुबकी लगाता है पल भर को दर्शकों की आँखे बंद हो जाती है । यह दृश्य भीतर तक हिला देता है ।“

एक व्यक्ति फेसबुक पर लिखते है की – Article 15 movie review

क्या है आर्टिकल 15 –

  • राज्य, किसी नागरिक से केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी भी आधार पर किसी तरह का कोई भेद-भाव नहीं करेगा
  • किसी नागरिक को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर किसी दुकान, सार्वजनिक भोजनालय, होटल और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों जैसे सिनेमा और थियेटर इत्यादि में प्रवेश से नहीं रोका जा सकता है। इसके अलावा सरकारी या अर्ध-सरकारी कुओं, तालाबों, स्नाघाटों, सड़कों और पब्लिक प्लेस के इस्तेमाल से भी किसी को इस आधार पर नहीं रोक सकते हैं।
  • यह अनुच्छेद किसी भी राज्य को महिलाओं और बच्चों को विशेष सुविधा देने से नहीं रोकेगा।
  • इसके अलावा यह आर्टिकल किसी भी राज्य को सामाजिक या शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष प्रावधान बनाने से भी नहीं रोकेगा।

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