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History of Samrat Ashoka , सम्राट अशोक कि कहानी ?

History of Samrat Ashoka , सम्राट अशोक कि कहानी ?

HISTORY OF ASHOKA . सम्राट अशोक कि कहानी |

सम्राट अशोक SAMRAT ASHOKA (History of Samrat Ashoka ) भारतीय इतिहास का एक एसा चरित्र है जिसकी तुलना विश्व में किसी के साथ नहीं कि जा सकती , आज हम उसी सम्राट अशोक And today we tel you history of ASHOKA के बारे बताएँगे | इनका ASHOKA का पूरा नाम अशोक विन्दुसार मौर्या था , इनके पिता का नाम बिन्दुसार और माता का नाम सुभद्रागी था | और ये मौर्या साम्राज्य के संस्थापक चन्द्रगुप्त के पोते थे |

SAMRAT ASHOK पचपन से ही साहसी थे , ये लड़ने से ही रूचि लेने लगे थे इसलिए उन्हें शाही प्रशिक्षण दिया गया |ये BUT SAMRAT ASHOKA साहसी होने के sath एक कुशल सिकारी भी थे जिसके कार उन्हें कम उम्रव में ही अवन्ती में हो रहे दंगो को रोकने के लिए भेज दिया गया|

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Great king Samrat Ashoka

Samrat Ashoka –सम्राट अशोक भारतीय इतिहास का एक ऐसा king कहा जाता हैं, ये भी कहा जाता है की सम्राट अशोक को कुशल सम्राट बनाने में आचार्य चाणक्य का बहुत बड़ा योगदान रहा।

268 c के समय मौर्य साम्राज्य सम्राट अशोक ने अफगानिस्तान के हिन्दू कुश में अपने साम्राज्य का विस्तार किया था उनके साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र (मगध, आज का बिहार) और साथ ही उपराजधानी तक्सिला और उज्जैन भी थी।

अशोक ने अपने-आप को कुशल प्रशासक सिध्द करते हुए तीन साल के भीतर ही राज्य में शांति स्थापित की। उनके शासनकाल में देश ने विज्ञान व तकनीक के साथ – साथ चिकित्सा शास्त्र में काफी तरक्की की। उसने धर्म पर इतना जोर दिया कि प्रजा इमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चलने लगी। चोरी और लूटपाट की घटानाएं बिलकुल ही बंद हो गईं।

अशोक घोर मानवतावादी थे। वह रात – दिन जनता की भलाई के काम ही किया करते थे। उन्हें विशाल साम्राज्य के किसी भी हिस्से में होने वाली घटना की जानकारी रहती थी। धर्म के प्रति कितनी आस्था थी, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि वह बिना एक हजार ब्राम्हणों को भोजन कराए स्वयं कुछ नहीं खाते थे, कलिंग युध्द अशोका के जीवन का आखरी युध्द था, जिससे उनका जीवन को ही बदल गया।Because Ashoka was a great King But Kaling war was last war of life of ashoka .

अशोका और कलिंगा घमासान युध्द – Ashok Kalinga War


तक़रीबन 260 BCE में अशोका ने कलिंग (वर्तमान ओडिशा) राज्य के खिलाफ एक विध्वंशकारी युद्ध की घोषणा की थी। उन्होंने कलिंग पर जीत हासिल की थी, इससे पहले उनके किसी पूर्वज ने ऐसा नही किया था। कलिंग के युद्ध में कई लोगो की मृत्यु होने के बाद अशोका ने बुद्ध धर्म को अपना लिया था।

Samrat Ashoka क्यों युद्ध न करने का फैसला लिया

कहा जाता है की अशोका के कलिंग युद्ध में तक़रीबन 1,00,000 लोगो की मौत हुई थी और 1,50,000 लोग घायल हुए थे। So after this war इस युध्द में हुए भारी रक्तपात ने उन्हें हिलाकर रख दिया। उन्हें तब ज्ञात हुआ कि यह सब लालच का दुष्परिणाम है और तब उन्होंने जीवन में फिर कभी युध्द न करने का प्रण लिया। अशोका ने 263 BCE में ही धर्म परिवर्तन कर बौद्ध धर्म अपना लिया और अहिंसा के पुजारी हो गये।

बाद में उन्होंने पुरे एशिया में बौध्द धर्म के प्रचार के लिए स्तंभों और स्तूपों का निर्माण कराया। बनवाए। अशोका के अनुसार बुद्ध धर्म सामाजिक और राजनैतिक एकता वाला धर्म था। बुद्ध का प्रचार करने हेतु उन्होंने अपने राज्य में जगह-जगह पर भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमाये स्थापित की। और बुद्ध धर्म का विकास करते चले गये।

बौध्द धर्म को अशोक ने ही विश्व धर्म के रूप में मान्यता दिलाई। विदेशों में बौध्द धर्म के प्रचार के लिए अशोक ने अपने पुत्र और पुत्री तक को भिक्षु-भिक्षुणी के रूप में भारत से बाहर भेजा।

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सार्वजानिक कल्याण के लिये उन्होंने जो कार्य किये वे तो इतिहास में अमर ही हो गये हैं। नैतिकता, उदारता एवं भाईचारे का संदेश देने वाले अशोक ने कई अनुपम भवनों तथा देश के कोने-कोने में स्तंभों एवं शिलालेखों का निर्माण भी कराया जिन पर बौध्द धर्म के संदेश अंकित थे।

भारत का राष्ट्रीय चिह्न ‘अशोक चक्र’ तथा शेरों की ‘त्रिमूर्ति’ भी अशोक महान की ही देंन है। ये कृतियां अशोक निर्मित स्तंभों और स्तूपों पर अंकित हैं। सम्राट अशोक का अशोक चक्र जिसे धर्म चक्र भी कहा जाता है, आज वह हमें भारतीय गणराज्य के तिरंगे के बीच में दिखाई देता है। ‘त्रिमूर्ति’ सारनाथ (वाराणसी) के बौध्द स्तूप के स्तंभों पर निर्मित शिलामुर्तियों की प्रतिकृति है।

अशोका के नाम “अशोक” का अर्थ “दर्दरहित और चिंतामुक्त” होता है। अपने आदेशपत्र में उन्हें देवनामप्रिया और प्रियदार्सिन कहा जाता है। कहा जाता है की सम्राट अशोका का नाम अशोक के पेड़ से ही लिया गया था।

आउटलाइन ऑफ़ हिस्ट्री इस किताब में अशोका में बारे में यह लिखा है की, “इतिहास में अशोका को हजारो नामो से जानते है, जहा जगह-जगह पर उनकी वीरता के किस्से है, उनकी गाथा पुरे इतिहास में प्रचलित है, वे एक सर्व प्रिय, न्यायप्रिय, दयालु और शक्तिशाली सम्राट थे।

लोकहित के नजरिये से यदि देखा जाये तो सम्राट अशोक ने अपने समय में न केवल मानवों की चिंता की बल्कि उन्होंने जीवमात्र के लिये कई सराहनीय काम भी किये है। सम्राट अशोक को एक निडर एवं साहसी राजा और योद्धा माना जाता था।

अपने शासनकाल के समय में सम्राट अशोक अपने साम्राज्य को भारत के सभी उपमहाद्वीपो तक पहुचाने के लिये लगातार 8 वर्षो तक युद्ध लढते रहे। इसके चलते सम्राट अशोक ने कृष्ण गोदावरी के घाटी, दक्षिण में मैसूर में भी अपना कब्ज़ा कर लिया परन्तु तमिलनाडू, केरल और श्रीलंका पर नहीं कर सके।

Because samrat Ashoka is a best King . आज भी उनके द्वारा पत्धारो पर खुदवाए गए ओ लेख और जिन्ह उपलब्ध है |

सम्राट अशोक की मृत्यु – Samrat Ashoka Death


सम्राट अशोक ने लगभग 40 वर्षों तक शासन किया। Emperor Samrat Ashoka ruled for almost 40 years and hear Death 232 es. ई. सा पूर्व 232 के आसपास उनकी मृत्यु हुयी।विश्व इतिहास में अशोक महान एक अतुलनीय चरित्र है। उस जैसा ऐतिहासिक पात्र अन्यत्र दुर्लभ है। भारतीय इतिहास के प्रकाशवान तारे के रूप में वह सदैव जगमगाता रहेगा।


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